CBSE बोर्ड ने स्कूलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। बोर्ड के संज्ञान में आया है कि कई बार परिपत्र जारी करने के बावजूद अनेक स्कूल अपनी वेबसाइट पर “मैन्डेटरी डिस्क्लोजर” के तहत आवश्यक जानकारियां सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए CBSE ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे योग्य शिक्षकों, प्रधानाचार्य, फीस संरचना और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां अपनी वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें। बोर्ड ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियमों का पालन न करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई और भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
अभिभावकों को स्कूल से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां आसानी से मिल सकें, इसके उद्देश्य से CBSE ने निर्देश दिया है कि हर स्कूल अपनी वेबसाइट पर प्रधानाचार्य और शिक्षकों का विवरण, प्रवेश प्रक्रिया, छात्रों की संख्या, शैक्षणिक परिणाम और अन्य शैक्षणिक जानकारी सार्वजनिक करे। इसके साथ ही स्कूलों को बोर्ड से संबद्धता प्रमाणपत्र, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट, हेल्थ एवं सैनिटेशन सर्टिफिकेट और बुनियादी ढांचे से जुड़ी सुविधाओं जैसे शौचालय, कक्षाएं और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध करानी होगी।
CBSE ने यह भी देखा है कि कई स्कूल बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद इन जानकारियों को साझा करने में लापरवाही बरत रहे हैं। इसी कारण बोर्ड ने “रिवाइज्ड मैन्डेटरी डिस्क्लोजर फॉर्मेट” लागू किया है। इस नए प्रारूप के अनुसार स्कूलों को संपर्क विवरण, पता, मान्यता प्रमाणपत्र, फीस का पूरा ढांचा, शैक्षणिक कैलेंडर, प्रबंधन समिति और PTA सदस्यों की सूची भी वेबसाइट पर प्रदर्शित करनी होगी।
इसके अलावा, स्कूलों को पिछले तीन वर्षों के बोर्ड परीक्षा परिणाम, शिक्षक-छात्र अनुपात, प्रशिक्षकों की जानकारी, स्कूल परिसर का क्षेत्रफल, प्रयोगशालाओं और अन्य मूलभूत सुविधाओं का विवरण भी सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। CBSE ने साफ तौर पर कहा है कि जानकारी छिपाने या नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सबसे महत्वपूर्ण निर्देश के तहत अब हर स्कूल को 30 छात्रों पर 1 शिक्षक का अनुपात बनाए रखना अनिवार्य होगा। इसमें काउंसलर, फिजिकल ट्रेनर और प्रधानाचार्य को शिक्षक के रूप में शामिल नहीं किया जाएगा। बोर्ड ने सभी स्कूलों को यह भी आदेश दिया है कि वे ये सभी जानकारियां निर्धारित समयसीमा, यानी 15 सितंबर से पहले अपनी वेबसाइट पर अपलोड करें। तय समय में नियमों का पालन न करने वाले स्कूलों पर CBSE द्वारा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
