स्याही को लेकर हुए विवाद के बीच महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने एक अहम निर्णय लिया है। आयोग ने आदेश दिया है कि अब आने वाली सभी चुनावों में मतदान के समय स्याही के लिए मार्कर पेन का उपयोग नहीं किया जाएगा। यह नया नियम आगामी जिला परिषद चुनावों से लागू किया जाएगा।
इस फैसले के पीछे मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के दौरान सामने आया स्याही विवाद मुख्य वजह माना जा रहा है। उस समय कई मतदाताओं ने शिकायत की थी कि मतदान के बाद उंगली पर लगाई जाने वाली ‘अमिट स्याही’ आसानी से मिट जा रही थी, जिससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए थे।
यह मुद्दा तब और गंभीर हो गया जब कल्याण से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) की उम्मीदवार उर्मिला तांबे ने सार्वजनिक रूप से इस पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग जानबूझकर कमजोर गुणवत्ता की स्याही का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि सत्ताधारी दल को फायदा पहुंचे और फर्जी मतदान की संभावना बनी रहे।
इन आरोपों और बढ़ते विवाद के बाद राज्य चुनाव आयोग ने स्थिति की समीक्षा की और यह निर्णय लिया कि भविष्य में मार्कर पेन के जरिए स्याही लगाने की व्यवस्था समाप्त की जाएगी। आयोग का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना और मतदाताओं का भरोसा मजबूत करना है।
अब आगामी जिला परिषद चुनावों में मतदान की प्रक्रिया के दौरान स्याही लगाने के लिए वैकल्पिक और अधिक सुरक्षित व्यवस्था अपनाई जाएगी, ताकि दोबारा मतदान या स्याही मिटने से जुड़े किसी भी विवाद से बचा जा सके।
