मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष के बीच ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, कुवैत के महत्वपूर्ण बिजली और समुद्री जल शुद्धिकरण (डिसैलिनेशन) संयंत्रों को निशाना बनाया गया, जबकि बहरीन में स्थित एक बड़े डेटा सेंटर पर भी हमले की खबर सामने आई है। इन घटनाओं के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है तथा अहम रणनीतिक प्रतिष्ठानों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जल शुद्धिकरण संयंत्र और डेटा सेंटर जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले केवल सैन्य तनाव ही नहीं बढ़ाते, बल्कि आम लोगों की दैनिक जरूरतों, इंटरनेट सेवाओं और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर असर डाल सकते हैं। खाड़ी के कई देशों में पीने के पानी की बड़ी जरूरत समुद्री जल शुद्धिकरण संयंत्रों से पूरी होती है, इसलिए ऐसे प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने से जल आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है।
क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार भी दबाव में हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच संघर्ष और तेज होता है, तो इसका असर तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की अपील कर रहा है।
